संकल्प की शक्ति
मनुष्य संकल्प के बल पर बहुत कुछ प्राप्त कर सकता है। संकल्प की शक्ति अनूठी होती है। इस शक्ति के बल पर ऐसे चमत्कार किए जा सकते हैं, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। हम हारने लगते हैं, थकने लगते हैं। बार-बार असफलता हमें निराश करने लगती है। मन उदासी से भर जाता है, उस समय मन का दृढ़ संकल्प हमें नई राह दिखाता है। संकल्प विहीन व्यक्ति जीवन में असफलता को प्राप्त करता है। उसके जीवन का उद्देश्य शून्य होने लगता है। जब तक संकल्प है, तभी तक जीवन में जीवटता है। संकल्प के न होने पर जीवटता भी शिथिल होने लगती है। हम अपने उद्देश्यों तक नहीं पहुंच पाते। संकल्प की शक्ति के सहारे ही भगवान श्रीराम ने नल-नील और वानरों की मदद से अथाह समुद्र पर पुल बांध लिया था। अगर संकल्प दृढ़ न होता तो यह कभी संभव नहीं हो पाता। दशरथ मांझी ने अपने संकल्प के बल पर ही कठोर चट्टान को काटकर मार्ग बना लिया। उसके अनथक प्रयास ने संकल्प के नए चमत्कार को सबके सामने प्रस्तुत किया। अरुणिमा सिन्हा ने एक पैर के सहारे ही एवरेस्ट की चोटी को जीत लिया। यह संकल्प ही है, जिसके सहारे गोताखोर समुद्र की गहराइयों तक पहुंचता है। अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाता है।
हमें जीवन में कोई भी कार्य करने से पहले कार्य पूर्ति का संकल्प लेना होगा, जिससे कार्य के प्रति हमारा समर्पण गहरा होने लगेगा। जब समर्पण गहरा होगा तो निश्चित ही सफलता हमारे कदम चूमेगी। हम बीच में अपने उद्देश्यों से नहीं भटकेंगे। संकल्प की सामर्थ्य अकल्पनीय है। संकल्प के लिए दृढ़ता का भाव अत्यंत आवश्यक है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रायः थोड़ी सी कठिनाई में ही मनुष्य विचलित होने लगता है। इससे संकल्पों की सिद्धि संभव नहीं हो पाती।
- ललित शौर्य
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