धैर्य की शक्ति

धैर्य की शक्ति

धैर्य में अद्भुत शक्ति है। अनेक संकटों का समाधान निहित है। जिन प्रश्नों का उत्तर विद्वान भी नहीं दे सके उनका हल सदैव धैर्य ने किया है। ऋषि-मुनियों ने धैर्य को भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताया है। सभी उपायों में धैर्य सर्वोत्तम है। संत पथिक जी महाराज का कहना था कि विश्व में जो भी झंझावात हैं, उनका समाधान धैर्य द्वारा सफलता पूर्वक किया जा सकता है।

सद्‌गुणों में धैर्य का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कठिन से कठिन परीक्षाओं को धैर्य के माध्यम से पार किया जा सकता है। यह एक सिद्ध प्रयोग है। महात्माओं ने धैर्य के चमत्कारी प्रभावों का उल्लेख किया है। ज्ञानार्जन से लेकर जीविकोपार्जन तक, धैर्य की परंपरा अद्भुत और उपयोगी है। यह सबसे सरल साधना के रूप में भी प्रतिष्ठित है। विद्यार्थी, व्यवसायी और राजनेता सभी ने धैर्य से लाभ उठाया है। कभी-कभी धैर्य के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता। विद्वानों ने समय को धैर्य से जोड़कर विशिष्ट प्रयोजन उद्घाटित किए हैं। लक्ष्य प्राप्ति के लिए समय का सम्मान आवश्यक है। समय का समादर ही धैर्य कहलाता है और काल की उचित प्रतीक्षा भी इसे परिभाषित करती है। इतिहास साक्षी है कि बड़े-बड़े महारथी और सम्राट भी समय के अधीन अपनी रणनीतियों को सफलतापूर्वक लागू कर सके। धैर्य धारण करने के बाद ही उनके समक्ष अवसर आए। विपरीत समय ने कभी उनका साथ नहीं दिया। केवल अनुकूल समय ने ही उन्हें विजय दिलाई, जो धैर्य के माध्यम से संभव हुआ।

इस प्रकार धैर्य केवल एक गुण नहीं, बल्कि जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यह हमें कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है और हमें सही समय पर सही निर्णय लेने में मदद करता है। धैर्य का अभ्यास करने से हम न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

- डा. राघवेंद्र शुक्ल

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